JS News 24 / Tue, Jun 30, 2026 / Post views : 423
पीलीभीत:- सनातन धर्म की प्राचीन और प्रतिष्ठित नाथ संप्रदाय परंपरा के खिलाफ की जा रही बयानबाजी को लेकर साधु-संतों और सनातनी समाज में गहरा आक्रोश है। नाथ संप्रदाय के प्रतिनिधियों ने शंकराचार्य परंपरा के संन्यासी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर व्यक्तिगत द्वेष और राजनीतिक महत्वाकांक्षा से ग्रसित होने का आरोप लगाया है। साथ ही, 1 जुलाई 2026 को पीलीभीत आ रही उनकी 'गौ-रक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा' को विभाजनकारी बताते हुए उन्हें गौ-संरक्षण के मुद्दे पर 'शास्त्र चर्चा' (शास्त्रार्थ) की खुली चुनौती दी गई है।
एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए नाथ संप्रदाय के प्रतिनिधि ने कहा कि वर्तमान समय में साधु समाज के वेश और परिवेश में कुछ लोग असामाजिक व अधार्मिक भावनाओं से ग्रसित होकर सनातन धर्म के सम्मान को ठेस पहुंचा रहे हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती विगत डेढ़ वर्षों से लगातार अत्यंत प्राचीन गौरक्ष नाथ संप्रदाय के सर्वोच्च पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ जी महाराज के प्रति व्यक्तिगत द्वेष के कारण अनुचित शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं, जिससे करोड़ों सनातनियों की भावनाएं आहत हुई हैं।
सरकार के 9 वर्षों के कार्यों पर चर्चा की चुनौती
प्रेस वार्ता में कहा गया कि मुख्यमंत्री और गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पूरे विश्व में सनातन धर्म का परचम लहरा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने विगत 9 वर्षों में गौ-संरक्षण के लिए जो ऐतिहासिक कार्य किए हैं, उन्हें नीचा दिखाने के लिए ही यह यात्रा निकाली जा रही है।
चुनौती देते हुए कहा गया, "मैं तथ्यों के आधार पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को शास्त्र चर्चा की चुनौती देता हूं कि वे आएं और बात करें कि पिछले 9 सालों में सरकार ने गौ-संरक्षण के लिए क्या किया और 9 साल पहले गोवंश की स्थिति क्या थी। या तो वे इस चुनौती को स्वीकार करें, अन्यथा अपनी हार मानकर पीलीभीत जनपद में प्रवेश किए बिना वापस लौट जाएं।"
महंत योगी हनुमान नाथ
आयोजकों से यात्रा का खंडन करने की अपील
प्रेस वार्ता के माध्यम से पीलीभीत में इस यात्रा के आयोजकों से भी अपील की गई है कि वे इस धर्म-विरोधी यात्रा का खंडन करें। प्रतिनिधि ने कहा कि यदि आयोजकों को लगता है कि यह यात्रा वास्तव में आवश्यक है, तो उनका भी प्रेस वार्ता में स्वागत है; वे आएं और तथ्यों के साथ सिद्ध करें कि यह यात्रा क्यों जरूरी है।
प्रेस वार्ता में यह साफ किया गया कि सनातन सभ्यता में अनेक आध्यात्मिक परंपराएं होने के बावजूद हमेशा परस्पर प्रेम रहा है। किसी भी आचार्य द्वारा दूसरे आचार्य के प्रति असम्मान की परंपरा कभी नहीं रही, लेकिन इस गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली किसी भी विध्वंसकारी हरकत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन