JS News 24 / Thu, Jun 25, 2026 / Post views : 343
पीलीभीत:- मां गोमती नदी की अविरल और निर्मल धारा को पुनर्जीवित करने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जनपद के प्रमुख औद्योगिक एवं व्यावसायिक भूजल उपभोक्ताओं और जिला स्तरीय अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में नदी के जीर्णोद्धार और जल संरक्षण कार्यों को गति देने के लिए निजी कंपनियों के सहयोग पर रणनीति बनाई गई।
सीएसआर के तहत मिला जिम्मेदारी का जिम्मा
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल प्रबंधन एवं विनियमन अधिनियम 2019 के प्रावधानों के अंतर्गत जो भी इकाइयां भूजल का दोहन करती हैं, उन्हें जल पुनर्भरण (रिचार्ज) के लिए आगे आना होगा। इसके तहत कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के अंतर्गत जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों को इन औद्योगिक व व्यावसायिक इकाइयों को आवंटित किया गया है, जहां ये जल संरक्षण और गोमती नदी के जीर्णोद्धार का कार्य संभालेंगी।
ज्ञानेन्द्र सिंह, जिलाधिकारी ने कहा "गोमती नदी के जीर्णोद्धार का कार्य सरकारी विभागों द्वारा कराया जा रहा है, लेकिन इसे पूरी तरह सफल बनाने के लिए जिले की प्रमुख औद्योगिक एवं व्यावसायिक इकाइयों का सहयोग अत्यंत आवश्यक है।"
बैठक में ये रहे मौजूद
इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य विकास अधिकारी, उपायुक्त (श्रम-रोजगार), अधिशासी अभियंता (भूगर्भ जल) और सहायक अभियंता (लघु सिंचाई) मौजूद रहे। इसके अलावा जनपद की प्रमुख व्यापारिक और औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए, जिनमें मुख्य रूप से: बजाज एनर्जी लिमिटेड, बजाज हिन्दुस्तान शुगर लिमिटेड, एल.एच. शुगर फैक्ट्री (शुगर व डिस्टिलरी डिवीजन), ए.बी. मौरी इण्डिया प्राइवेट लिमिटेड, मोदी नैचुरल्स, रॉयल किंगडम रिसोर्ट सभी औद्योगिक उपभोक्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे आवंटित ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शुरू करें ताकि भूगर्भ जल स्तर को सुधारा जा सके और गोमती नदी को उसका पुराना स्वरूप वापस मिल सके।
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