JS News 24 / Thu, Feb 19, 2026 / Post views : 567
पीलीभीत:- पीलीभीत जिले कि सियासत में उस समय गर्मी आ गई जब बसपा से तीन बार के विधायक और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रहे अनीस अहमद खां उर्फ फूल बाबू ने 15 फरवरी को लखनऊ स्थित सपा पार्टी कार्यालय पर सदस्यता ग्रहण की और 17 फरवरी को पीलीभीत जिले में उनका प्रथम आगमन हुआ जिसमें कार्यकर्ताओ ने जोरदार स्वागत किया।
पूर्व मंत्री का राजनीतिक सफर
अनीस अहमद खां उर्फ फूल बाबू ने कांग्रेस पार्टी से अपनी राजनीति शुरू कि जिसके बाद वह बसपा में गए और 1996 में पहली बार विधायक बने जिसके बाद वह लगातार 2002 और 2007 में विधायक बने और इस दौरान सरकार में मंत्री भी रहे। यह तीनों चुनाव उन्होंने वर्तमान 130 विधानसभा बीसलपुर से जीते जिसके बाद से उन्हें अब तक लगातार हार का सामना करना पड़ा इस दौरान उन्होंने कांग्रेस से भी विधानसभा के चुनाव लड़ें लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली और वह लोकसभा चुनाव में भी अपना परचम लहराने के लिए चुनाव मैदान में आए लेकिन आज तक उनको सफलता नहीं मिली 15 फरवरी 2026 से फूल बाबू ने सपा का दामन थाम लिया है और देखना होगा कि वह जिले कि किस सीट से चुनाव मैदान में आएंगे।
सपा कहा से लड़ाएगी चुनाव
फूल बाबू के सपा में शामिल होने के बाद से हमने जब पूर्व मंत्री से वार्ता कि तो उनका साफ तौर पर कहना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष को हम जिले की चारों विधानसभाओं में जीत दिलाने के लिए पार्टी में आए हैं जब हमने उनसे उनके चुनाव लडने को पूछा तो उनका साफ कहना था कि जहां से राष्ट्रीय अध्यक्ष टिकट देंगे हम वहां से चुनाव लडेंगे। लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा आम है कि जिले कि 130 विधानसभा से तीन बार के विधायक और मंत्री रहे फूल बाबू इस बार 127 सदर विधानसभा पीलीभीत से चुनाव लडेंगे।
वर्तमान मंत्री और पूर्व मंत्री पर चर्चा
पीलीभीत जिले की 127 सदर विधानसभा सीट से अगर सपा अपना प्रत्याशी पूर्व मंत्री को बनाती है तो वर्तमान मंत्री संजय सिंह गंगवार और पूर्व मंत्री फूल बाबू में दिलचस्प मुकाबला आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा। राजनीतिक गलियारों से आ रही खबरों का कहना है कि इस सीट पर मरहूम हाजी रियाज अहमद की जगह से सपा पूर्व मंत्री को मैदान में लाएगी और मुकाबला इस लिए दिलचस्प होगा कि वर्तमान मंत्री के पूर्व मंत्री किसी समय में राजनीतिक गुरु रह चुके हैं।
जिले में सपा संगठन का हाल
राजनीतिक गलियारों से चल रही चर्चा से जिले में अगर हम वर्तमान समय में सपा संगठन को लेकर बात करते तो संगठन में बिखराव की स्थिति बनी हुई है जिसको लेकर पूर्व मंत्री को संघर्ष करना पड़ेगा अगर जिले कि चारों विधानसभाओं में जीत हासिल करनी है। भाजपा के संगठन के समाने आज कि स्थिति में सपा का संगठन कमजोर साबित हो रहा है।
पीलीभीत जिले कि राजनीतिक गलियारों से खबरें चल रही हैं कि सपा में पूर्व मंत्री के आने के बाद से जिले कि वर्तमान स्थिति सपा के लिए मजबूत हो गई है अब देखना होगा कि सपा आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में अपना खाता खोल पाएगी या नहीं।
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