JS News 24 / Fri, Sep 25, 2026 / Post views : 324
पीलीभीत:- खकरा नदी किनारे अवैध रूप से बसाई जा रही कॉलोनियों में जमीन की खरीद-फरोख्त अब गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए आंसुओं का सबब बनती जा रही है। शहर की केजीएन-2 कॉलोनी में कर्ज और मेहनत की कमाई से तैयार एक गरीब का आशियाना प्रशासन के बुलडोजर ने एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के नियमों का हवाला देकर मिनटों में ध्वस्त कर दिया। मकान ढहाए जाने के दौरान पीड़ित परिवार बिलख-बिलख कर रोता रहा।
पीड़ित जियाउद्दीन ने आरोप लगाया कि उसने समाजवादी पार्टी के जिला महासचिव एवं कॉलोनाइजर नफीस अंसारी से केजीएन-2 कॉलोनी में प्लॉट खरीदा था। मकान खड़ा करने के लिए उसने बैंक से लोन लिया था। आर्थिक तंगी के कारण घर के पुरुषों के साथ महिलाओं और बच्चों ने भी मजदूरी करके एक-एक ईंट जोड़ी थी। मकान लगभग बनकर तैयार ही हुआ था कि सिटी मजिस्ट्रेट की टीम ने बिना किसी पूर्व नोटिस के उसे बुलडोजर से जमींदोज कर दिया।
पीड़ित परिवार ने सवाल उठाया कि यदि नदी किनारे निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित था, तो कॉलोनाइजर ने नियमों को छिपाकर उन्हें यह भूखंड क्यों बेचा?
राजनीतिक षड्यंत्र बनाम प्रशासनिक कार्रवाई
मामले में सिटी मजिस्ट्रेट प्यारेलाल मौर्य का कहना है कि खकरा नदी के प्रतिबंधित दायरे (नो-कंस्ट्रक्शन जोन) में निर्माण किए जाने के कारण एनजीटी के निर्देशों के तहत यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध रूप से प्लॉटिंग करने और बेचने वाले कॉलोनाइजर के खिलाफ भी जल्द ही वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
वहीं दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के जिला महासचिव व कॉलोनाइजर नफीस अंसारी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि वे सक्रिय राजनीति में हैं, इसलिए राजनीतिक दबाव बनाने और छवि धूमिल करने के उद्देश्य से प्रशासन द्वारा यह कार्रवाई की जा रही है।
उठ रहे गंभीर सवाल
इस घटना के बाद शहर में प्रशासनिक प्रणाली पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब खकरा नदी के किनारे प्लॉटिंग और निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है, तो कॉलोनाइजर बेखौफ होकर जमीन कैसे बेच रहे हैं? शुरुआती दौर में ही इस अवैध धंधे पर रोक क्यों नहीं लगाई जाती? प्रशासन की देर से जागी नींद का खामियाजा उन मासूम लोगों को भुगतना पड़ रहा है, जिनकी जिंदगी भर की जमा-पूंजी और आशियाने का सपना ध्वस्त हो चुका है।
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