JS News 24 / Sun, Feb 22, 2026 / Post views : 2794
पीलीभीत:- 130 विधानसभा में अगर समाजवादी पार्टी के संगठन और आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बात करें तो इस बार चुनाव मैदान में आने वाले दावेदार पूर्व मंत्री को लगातार बधाई दे रहे हैं और सपा कि पूर्व प्रत्याशी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा अलग है क्योंकि पूर्व प्रत्याशी और संगठन में लम्बे समय से दरार पड़ी हुई है जो कि जग जाहिर है ऐसे में पूर्व मंत्री कैसे इस विधानसभा को जिताएंगे यह एक सवाल बना हुआ है।
130 विधानसभा में 3 बार के विधायक और मंत्री रहे फूल बाबू ने बसपा छोड़ सपा ज्वाइन कर ली है जिसके बाद से यहां कि राजनीति के समीकरण बदल गए हैं सपा से लड़ने वाले प्रत्याशीयों को जब पता चला कि पूर्व मंत्री 127 सदर विधानसभा से चुनाव लडेंगे तब उनकी सांस में सांस आई और उनका स्वागत कर उन्हें बधाई दी जबकि पूर्व मंत्री का कहना कहना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जहां से कहेंगे हम वहां से चुनाव लडेंगे। फिलहाल जिले में पूर्व मंत्री के सपा में आने के बाद से पार्टी को एक अलग मजबूती मिली है जिसकी चारो तरफ चर्चा हो रही है।
2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा से फूल बाबू और सपा से दिव्या गंगवार आमने-सामने थीं और इस चुनाव में अधिक संख्या में यहां के मुस्लिम वोटरों ने जाति को छोड़ कर अखिलेश यादव को मजबूत करने के लिए दिव्या गंगवार को वोट दिया जिसका नतीजा यह रहा कि वह दूसरे नंबर पर पहुंची और फूल बाबू तीसरे नंबर पर पहुंचे लेकिन आगामी विधानसभा के चुनाव में फूल बाबू के सपा में आने से यहां के समीकरण बदल गए हैं।
फूल बाबू के सपा ज्वाइन करने के बाद पहली बार जिले में आने पर उनका सपा 130 विधानसभा संगठन व कार्यकर्ताओं द्वारा स्वागत विधानसभा में गर्मजोशी से किया गया लेकिन पूर्व प्रत्याशी के द्वारा जिला मुख्यालय पर पार्टी कार्यालय पहुंचना कहीं न कहीं एक संदेश दे गया जिसके बाद सपा में शिक्षक सभा के प्रदेश महासचिव सुरेंद्र गंगवार भी स्वागत कार्यक्रम से दूर दिखे और अगले दिन पूर्व मंत्री के आवास पर जाकर स्वागत किया और फिर उनके फोटो के साथ अपनी फ्लेक्सी सोशल मीडिया पर वायरल कर दी जबकि इसी विधानसभा से समाजवादी पार्टी से चुनाव को लेकर संघर्षरत सपा के प्रदेश पदाधिकारी हरिपाल लोधी और पार्टी पदाधिकारी मीनाक्षी गंगवार पूर्व मंत्री के स्वागत कार्यक्रम में शुरू से लेकर आखिरी वक्त तक मौजूद रहें।
130 विधानसभा से समाजवादी पार्टी कि पूर्व प्रत्याशी रही दिव्या गंगवार कि संगठन से दूरियां तो जग जाहिर है ही लेकिन अगर अब पूर्व मंत्री से इसी तरह की दूरियां बनने लगी तो इस बार कहीं न कहीं बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है ऐसा यहां के राजनितिज्ञो का मानना है।
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